हिंदी दिवस पर अमित शाह बनाम ओवैसी : बात एकतत्व बनाम विविधता की है
हिंदी दिवस पर अमित शाह बनाम ओवैसी : बीते हिंदी दिवस की सभी को शुभकामनाएं! गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में एक समारोह को संबोधित कर रहे थे और उन्होंने संविधान के अनुरूप हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए हिंदी भाषा को एक देश एक भाषा के स्वरूप में डालते हुए राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की पुरानी जायज़ मांग की वकालत की लेकिन इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी सदैव ही अन्य भाषाओँ और बोलियों के साथ सह-अस्तित्व में रही है क्योंकि वह समावेशी रही है इसलिए हिंदी को अन्य भाषा के विघटन कारक के तौर पर नहीं बल्कि समावेशी कारक के रूप में देखना चाहिए।
गृह मंत्री ने साफ-साफ बयान दिया लेकिन विपक्षी नेताओं को चैन कहां अपनी जहर भरी जुबान लेकर आने खड़े हुए हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी जिन्होंने उर्दू-हिंदी का प्रयोग करते हुए ही हिंदुत्व और हिंदी को निशाना बनाते हुए आरएसएस बीजेपी के हिंदी के राष्ट्रभाषा घोषित किये जाने के राष्ट्रवादी माँग को देश की बनावटी बहुसंस्कृति के लिए खतरा बता डाला और कहा कि भारत हिंदू हिंदी हिंदुत्व से बहुत ऊपर है।
ओवैसी की भड़काई हुई आग हिंदी का विरोध करने वाली भूमि रही तमिलनाडु जहाँ पहुंची जहां विपक्ष के प्रमुख नेता स्टालिन ने मीडिया से बात करते हुए कहा हम हिंदी का अपने कहो काफी समय से विरोध कर रहे हैं आज गृह मंत्री अमित शाह के बयान से हमें धक्का पहुंचाया गया है इससे देश की एकता प्रभावित होगी उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए।
हिंदी दिवस पर अमित शाह बनाम ओवैसी : दिख ही गया ज़ेहरीलापन वह भी दोगलई वाला
ओवैसी और स्टालिन जैसे कुतर्की और जहरीले लोगों के लिए तो बस इतना ही कहा जा सकता है कि भगवान इन्हे सद्बुद्धि दें ताकि वह जान सकेंगी जो उर्दू और तमिल भाषा वह बोलते हैं उसकी जड़े हिंदी की मूल भाषा संस्कृत से आई है तो जो आदि है तो वह तो अनंत रहेगा ही और चाहे कोई माने या ना माने हिंदी है और हिंदी ही रहेगी।
संविधान के नजरिए से भाषा की स्थिति समझें तो आर्टिकल 343 में भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा हिंदी देवनागरी लिपि में होगी यह वर्णित है और यहां तक कि सारे अंक भी हिंदी में होंगे तो वहीँ संविधान की धारा 29 हर भारतीय नागरिक को अपनी भाषा और संस्कृति अपनाने का अधिकार देती है।
अब संविधान में सभी को साथ ले चलते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा और सभी को उसकी स्वयं की दूसरी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा बोलने का अधिकार दिया हुआ है लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जो दक्षिण भारत हिंदी का विरोध करता है वह खुद अपनी भाषा का प्रचार प्रसार इतने सालों में नहीं कर पाया और आज भी वह अंग्रेजी को तवज्जो पहले देता है और उसकी दोगलई इतनी चरम है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए हिंदी प्रचार सभा जो भारत सरकार की एक संस्था है वहां से हिंदी पढ़ कर ही नौकरी पाते हैं।
इसी दोगलेपन के चलते आज भी हिंदी राज स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन एक दिन जिस तरीके से आज अंतर्राष्ट्रीय जगत हिंदी को खुले बाहों से अपना रहा है भारत भी गुलदस्ता लिए अपनी मां हिंदी का स्वागत करेगा हर जगह , हर समय ! क्योंकि हिंदी हैं यह हिंदुस्तान है हमारा। नफरत से बाँटती नहीं हिंदी प्यार से समेटती है हिंदी ! गर्व है हिंदी भाषी होने पर क्योंकि हिंदी है तो हिंदुस्तान है। गर्व से बोलो हिंदी ! गर्व से कहो हम है हिन्दू !
हिंदी दिवस की सभी को शुभकामनाएं !
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

